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VOL. 8, ISSUE 3 (2026)
छत्तीसगढ़ की छुईखदान एवं कवर्धा रियासत में भू-राजस्व प्रशासन तथा भूमि बंदोबस्त: एक समीक्षात्मक एवं तुलनात्मक अध्ययन (1865- 1908)
Authors
डॉ. दीपक वर्मा
Abstract
19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध और 20वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों (1865-1908) के दौरान मध्य प्रांत के अंतर्गत आने वाली छत्तीसगढ़ की देशी रियासतों (Feudatory States) में महत्वपूर्ण प्रशासनिक, राजकोषीय एवं संस्थागत परिवर्तन हुए। प्रस्तुत शोध पत्र छुईखदान और कवर्धा रियासतों के भू-राजस्व प्रशासन, बंदोबस्त प्रणालियों, कर संरचनाओं तथा राज्य-मध्यस्थ-कृषक संबंधों का एक समीक्षात्मक एवं तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि छुईखदान में भू-राजस्व प्रणाली काफी हद तक पारंपरिक सामंती व्यवस्था, नजराना प्रथा, विविध उपकरों और श्कठेना भंडारश् जैसे करों से संचालित होती रही, जहाँ राजा एवं गोटिया/ठेकेदारों के मध्य राजस्व हिस्सेदारी को लेकर निरंतर तनाव रहा। इसके विपरीत, कवर्धा रियासत में श्नागरश् (हल) एवं श्खांडीश् जैसी मूल्यांकन पद्धतियों से निकलकर ब्रिटिश तर्ज पर वैज्ञानिक भूमि वर्गीकरण, कैडस्ट्रल सर्वेक्षण और 12.% के निश्चित उपकर व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू किया गया। 1896-1900 के भीषण अकालों के दौरान कवर्धा के बंदोबस्त ने गोंटियाओं के पारिश्रमिक को बढ़ाकर (2%) और श्संरक्षित दर्जाश् देकर अधिक स्थायित्व प्रदान किया, जबकि छुईखदान में व्यवस्था के बारम्बार विफल होने से राज्य को गाँवों को श्खामश् (प्रत्यक्ष नियंत्रण) के अंतर्गत लेना पड़ा। यह अध्ययन रियासती छत्तीसगढ़ में मध्यकालीन सामंती व्यवस्था से औपनिवेशिक-अम्लाशाही प्रशासनिक संरचना की ओर हुए क्रमिक संक्रमण को रेखांकित करता है।
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Pages:112-115
How to cite this article:
डॉ. दीपक वर्मा "छत्तीसगढ़ की छुईखदान एवं कवर्धा रियासत में भू-राजस्व प्रशासन तथा भूमि बंदोबस्त: एक समीक्षात्मक एवं तुलनात्मक अध्ययन (1865- 1908)". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 8, Issue 3, 2026, Pages 112-115
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