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VOL. 8, ISSUE 3 (2026)
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में श्री अरविंद घोष की भूमिका
Authors
Dr. Indu Baghel
Abstract
श्री अरविंद घोष भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख राष्ट्रवादी चिंतक, क्रांतिकारी नेता और दार्शनिक थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के विचार को राजनीतिक मुक्ति के साथ-साथ राष्ट्रीय आत्मसम्मान, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक विकास से जोड़ा। बंगाल विभाजन के बाद वे सक्रिय राजनीति में प्रमुख रूप से उभरे तथा स्वराज, स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा को राष्ट्रीय आंदोलन के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के रूप में स्थापित करने में योगदान दिया। उन्होंने पूर्ण स्वतंत्रता को भारत के राजनीतिक भविष्य का आवश्यक लक्ष्य माना और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संगठित प्रतिरोध तथा राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता पर बल दिया। उनके लेखन और पत्रकारिता ने विशेष रूप से युवाओं में राष्ट्रीय चेतना, आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में उन्होंने संगठन, जन-जागरण और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए व्यापक संघर्ष की आवश्यकता पर बल दिया। अलीपुर बम कांड के बाद उनके चिंतन में महत्वपूर्ण आध्यात्मिक परिवर्तन आया और 1910 में उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाकर पांडिचेरी में आध्यात्मिक साधना का मार्ग अपनाया। बाद के चिंतन में उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता को मानव-एकता और विश्व समुदाय के व्यापक आदर्श से जोड़ा। इस प्रकार भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में श्री अरविंद का योगदान राजनीतिक राष्ट्रवाद, पूर्ण स्वतंत्रता, स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा, क्रांतिकारी चेतना और आध्यात्मिक मानवतावाद के समन्वय के रूप में देखा जा सकता है।
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Pages:85-86
How to cite this article:
Dr. Indu Baghel "भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में श्री अरविंद घोष की भूमिका". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 8, Issue 3, 2026, Pages 85-86
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