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International Journal of
Social Science and Humanities
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VOL. 4, ISSUE 2 (2022)
भारत में कौशल विकास कार्यक्रम: ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विशेष संदर्भ में
Authors
डॉ. पुष्पा देवांगन
Abstract
भारत में बेरोजगारी और बैगारी की समस्या को दुर करने व आय का स्तर उठाने और क्षेत्रीय विषमताओं को कम करने के लिए व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास पर जोर देने की जरूरत है। इस दिशा में मौजूद प्रयासों के साथ-साथ सरकार को कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण को औपचारिक शिक्षा से जोड़ने और अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में तेजी से हो रहे बदलावों के अनुरूप ढालना होगा। वर्तमान में विश्व में इंडस्ट्री 4.0 की लहर चल रही हैं। विकसित देशों में तेजी से उद्योगों में आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस अपनाकर उत्पादन प्रक्रिया को स्वचालित किया जा रहा है। इसी को इंडस्ट्री 4.0 नाम दिया गया है। इससे विनिर्माण उघोग में रोजगार के अवसर सीमित होने की संभावना है। ऐसे में कौशल विकास औद्योगिक प्रशिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार करते वक्त इस बात का पूरा ध्यान रखना होगा कि हमारे युवा आज के उद्योगों की जरूरत के अनुसार कुशल और रोजगार के लायक हों। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय आवश्यकता संसाधनों और परंपरागत ज्ञान को ध्यान में रखकर हमें कोर्स की विषयवस्तु तैयार करनी होगी, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जरूरत के हिसाब से भी कुशल श्रमबल तैयार किया जा सकें।
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Pages:182-185
How to cite this article:
डॉ. पुष्पा देवांगन "भारत में कौशल विकास कार्यक्रम: ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विशेष संदर्भ में". International Journal of Social Science and Humanities, Vol 4, Issue 2, 2022, Pages 182-185
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